4 जनवरी 2020
आज नए साल का पहला शनिवार है।शनिवार मुझे बहुत ही प्रिय वार लगता है।मैं हर नया काम शनिवार को ही करती हूं।आज नए घर मे भगवान का पहला सत्संग रखा।सुबह से घर की सफाई की और शाम की पूजा की तैयारी करी।मैं बाजार मे घर के राशन के लिए सामान लेने गई।और जब सामान लेकर घर आई तो देखा कि मेरा भाई पप्पू भी राशन का सारा सामान लेकर आया।उसको देखकर मेरी आँखों मे प्रेम के आँसू आ गए।जब सामान चेक किया तो आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा,क्योंकि हर सामान एक जैसा था।जो वस्तु मेरे सामान मे थी,वही की वही उसके सामान मे भी थी।कोई अलग नहीं था।ऐसा लग रहा था मानो हम दोनों भाई बहन ने मिलकर ही सामान की लिस्ट बनाई हुई हो जबकि ऐसा कुछ नहीं था।सब अनजाने मे हो रहा था।ये चमत्कार हम दोनों भाई बहन के प्रेम का उदाहरण दे रहा था।
शाम को सब जने आ गए।मैंने 9 ग्रह देवता की तस्वीर को आसन पर बिठाया,और उनकी पूजा करी।9 दीपक जलाएं।8 दीपक तिल के तेल के और एक बीचो बीच सरसो के तेल का दीपक शनिदेव जी के लिए जलाया।5 बजे लेपटॉप पर ही शनिदेव जी की कथा चलाई और सब जनो ने बहुत ही शांति से कथा सुनी।कथा के तुरंत बाद हनुमान चालीसा पढ़ी।जब हनुमान चालीसा चल रही थी तभी अचानक बीच मे चल रहा सरसो के तेल का दीपक बुझ गया,जबकि उसके अंदर का तेल खत्म नहीं हुआ था।मुझे ऐसा आभास हुआ कि शनिदेव यहाँ से चले गए।मुझे बहुत रोना आ गया।लोग कहते है कि शनिदेव जाते हुए अच्छे लगते है,लेकिन मुझे उनके जाने पर बहुत ही रोना आ रहा था।मुझे उस दीपक के बुझते ही एक खालीपन सा महसूस होने लगा।मुझे जो महसूस हो रहा था,उसको मैं अभिव्यक्त भी नही कर पा रही थी।पर चाहे कोई माने या ना माने,मैं उस चमत्कार को देख पा रही थी।मैंने शनिदेव जी को मन ही मन प्रणाम किया और उन्हें इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन्होंने मुझे इतना संघर्ष वाला जीवन और दुःख दिया।क्योकि अगर मेरे जीवन मे दुःख और पति से दूरियां नही होती तो मुझे शनिदेव के दर्शन कभी प्राप्त नहीं होते।
शनिदेव जी के दर्शन मुझे सौभाग्य से मिले,इसलिए मुझे अब अपने इस जीवन से कोई शिकायत नहीं।
ॐश शनैश्चराय नमो नमः
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