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Showing posts from September 21, 2017

मेरा सच-चरण 4

उस समय हमारा मकान बहुत छोटा था। एक कमरा और एक छोटी सी रसोई थी जिसमे मैं और मेरा छोटा भाई पढाई करते थे।टॉयलेट बाथरूम कुछ नहीं थे।शौच के लिए बाहर जाते थे और नहाने के लिए घर के पीछे एक खाली जगह पर एक पत्थर रखा हुआ था जिस पर बैठ कर नहाते थे।मुझे खुले मे शौच करने मे और बाहर खुले मे नहाने मे बहुत शर्म आती थी इसलिए मैं इसी डर से सुबह जल्दी उठकर शौच और स्नान से निवृत्त हो जाती थी ।मुझे पढ़ने का बहुत शौक था ,पर घर छोटा था,छोटे भाई बहन मस्ती करते थे,आये दिन कोई न कोई गाँव से मेहमान आते थे  लेकिन पढ़ने की रूचि के कारण इन सब चीजों का मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा।मैं छत पर जाकर एक छोटी हल्की लाइट के उजाले मे पढाई करती थी।मै हमेशा 3 बजे उठकर पढ़ती थी क्योकि उस समय बिल्कुल शांत माहौल होता था। 3 से 5 पढ़ने के बाद मैं 5 बजे शौच के लिए चली जाती थी।हालांकि घर के पास ही शमसान था,पर उस समय पता नहीं क्यों कभी डर ही नहीं लगा।शौच से आने के बाद नहाती और फिर चूल्हा लगाकर खाना बनाती।मैं चाहती थी की मम्मी के उठने से पहले सारा काम हो जाये । मम्मी पापा बहुत मेहनत करते थे तो मुझे उनकी बहुत चिंता थी।पर मैं चाहे कितना ह...