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Showing posts from 2017

मेरा सच-चरण 20

और इन्ही घरेलू झगड़ो के कारण शादी के तुरंत तीन महीने  बाद ही मुझे काम के लिए घर से निकलना पड़ा।इसी दौरान मैं प्रेगनेंट भी हो गई। घर की परिस्थियों को देखते हुए मैं जल्दी बच्चा न...

मेरा सच-चरण 18

5 मई 1998 को सुसराल की दहलीज पर पहला कदम था। नए जीवन मे बहुत सी आशाएं थी,मैं एक अच्छी पत्नी,एक अच्छी बहु ,एक अच्छी भाभी बनना चाहती थी।मन मे धारणा बना कर गई थीं कि सुसराल मे सबका सम्मा...

मेरा सच-चरण 17

बी.ए. फर्स्ट ईयर मे आते ही पापा मम्मी मेरी शादी की योजना बनाने लगे।पंडित जी के पास जाकर शादी का मुहूर्त निकलवाने गए। 4 मई का मुहूर्त निकला था,पापा को शादी के लिए वही टाइम सबसे उ...

मेरा सच-चरण 16

इस तरह 12 वीं कक्षा की पढाई और ब्यूटी पार्लर का कोर्स साथ साथ चल रहा था।12वीं मे भी फर्स्ट डिवीज़न की तैयारी कर रही थी पर घर का काम,ब्यूटी पार्लर का काम,कठिन विषय सब एक साथ होने से म...

मेरा सच-चरण 4

उस समय हमारा मकान बहुत छोटा था। एक कमरा और एक छोटी सी रसोई थी जिसमे मैं और मेरा छोटा भाई पढाई करते थे।टॉयलेट बाथरूम कुछ नहीं थे।शौच के लिए बाहर जाते थे और नहाने के लिए घर के पीछे एक खाली जगह पर एक पत्थर रखा हुआ था जिस पर बैठ कर नहाते थे।मुझे खुले मे शौच करने मे और बाहर खुले मे नहाने मे बहुत शर्म आती थी इसलिए मैं इसी डर से सुबह जल्दी उठकर शौच और स्नान से निवृत्त हो जाती थी ।मुझे पढ़ने का बहुत शौक था ,पर घर छोटा था,छोटे भाई बहन मस्ती करते थे,आये दिन कोई न कोई गाँव से मेहमान आते थे  लेकिन पढ़ने की रूचि के कारण इन सब चीजों का मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा।मैं छत पर जाकर एक छोटी हल्की लाइट के उजाले मे पढाई करती थी।मै हमेशा 3 बजे उठकर पढ़ती थी क्योकि उस समय बिल्कुल शांत माहौल होता था। 3 से 5 पढ़ने के बाद मैं 5 बजे शौच के लिए चली जाती थी।हालांकि घर के पास ही शमसान था,पर उस समय पता नहीं क्यों कभी डर ही नहीं लगा।शौच से आने के बाद नहाती और फिर चूल्हा लगाकर खाना बनाती।मैं चाहती थी की मम्मी के उठने से पहले सारा काम हो जाये । मम्मी पापा बहुत मेहनत करते थे तो मुझे उनकी बहुत चिंता थी।पर मैं चाहे कितना ह...

मेरा परिचय-

जय श्री कृष्णा  मैं राधा सेन राजस्थान के उदयपुर की रहने वाली हु मेरा जन्म 23 अप्रैल 1978 को हुआ था मैं अपने संघर्ष रूपी जीवन की कहानी को आपके साथ शेयर करके अपना पहला ब्लॉग मेरा सच लिखने जा रही हु  मैं आशा करती हूं कि आपको मेरा ब्लॉग पसंद आये  मेरे ब्लॉग का शीर्षक मेरा सच इसलिए रखा क्योकि मैंने अपने जीवन मे केवल सत्य और ईमान का पालन किया है बचपन से लेकर अब तक केवल स्वाभिमानी जीवन जिया है ।सत्य ,ईमान,स्वाभिमान,निस्वार्थ प्रेम,ये सब सोने के गहनों के समान है सोने  के  गहने आग मे तप कर ही आकार ले पाते है वैसे ही सत्य को भी आग मे तपना पड़ता है  मुझे अपने जीवन मे सत्य और स्वाभिमानी का पालन करने के लिए कई बार इस संसार रूपी आग मे तपना पड़ा है सत्य कठोर परीक्षा मांगता है जो मैं अब तक के अपने जीवन मे देती जा रही हु ये संसार कभी सत्य का साथ नहीं देता  सत्य का साथ केवल ईश्वर ही देता है  लोग कहते है कि कलयुग मे भगवान् नहीं दिखते लेकिन मैंने भगवान् को बहुत करीब से देखा है मैने कई बार दृश्य और अदृश्य रूपो मे भगवान् को मेरी सहायता करते देखा है  इसीलिए कहा...