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मेरा सच-चरण 7

हर साल वार्षिक परीक्षा खत्म होते ही मैं नाना जो को पोस्टकार्ड मे चिट्टी लिखती थी।।             चिट्टी की पंक्तिया इस प्रकार थी-                    सेवामें,                      श्रीमान नानाजी को लिखी उदयपुर से आपकी दोहिती राधा का चरण स्पर्श मालूम होवे।हम सब यहाँ पर राजी ख़ुशी मजे मे है।आशा करती हूँ कि आप सब भी वहाँ मजे मे होंगे।आगे समाचार यह है कि हमारी गर्मी की  छुट्टियां पड़ गई है इसलिये आप हमें लेने आ जाये। चिठ्ठी पढ़ते ही तुरंत उदयपुर आ जाये। मुझे आपकी बहुत याद आ रही है।सभी मामा जी और मामी जी को भी मेरा चरण स्पर्श कहना।छोटी मासी को भी धोक देती हूं।चिठ्ठी पढ़ने वाले को भी मेरा नमस्कार।।।                             ...